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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Feb 7, 2017

आजा पंछी अकेला है-फिल्म-नौ दो ग्यारह (1957)


मूल गायक:मोहम्मद रफी और आशा भोंसले
 गीत: मजरूह सुल्तानपुरी 
संगीत: सचिन देव बर्मन 
फिल्म: नौ दो ग्यारह (1957)
Cover Singers-Safeer & Alpana
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Lyrics-
ओ आजा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है
उड़ गई नींद यहां मेरे नैन से
बस करो यूं ही पड़े रहो चैन से
उड़ गई नींद यहां मेरे नैन से
बस करो यूं ही पड़े रहो चैन से
लागे रे डर मोहे लागे रे
ओ ये क्या डरने की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है

ओहो कितनी घुटी सी है ये फ़िज़ा
आहा कितनी सुहानी है ये हवा
ओहो कितनी घुटी सी है ये फ़िज़ा
आहा कितनी सुहानी है ये हवा
मर गये हम, निकला दम, मर गये हम
ओ मौसम कितना अलबेला है
ओ आजा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है

बिन तेरे कैसी अंधेरी ये रात है
दिल मेरा धड़कन मेरी तेरे साथ है
बिन तेरे कैसी अंधेरी ये रात है
दिल मेरा धड़कन मेरी तेरे साथ है
तन्हां है फिर भी दिल तन्हां है
ओ लागा सपनों का मेला है
ओ आजा पंछी अकेला है
ओ सो जा निंदिया की बेला है
ओ आजा पंछी अकेला है

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