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Dec 25, 2013

रूठे हो तुम तुमको कैसे मनाऊं ...

रूठे हो तुम ...
नय्यारा नूर 

पाकिस्तानी फिल्म-आईना
मूल गायिका-नय्यारा नूर
संगीत -रोबिन घोष

गीत -
रूठे ही तुम तुमको  कैसे मनाऊं पिया,
बोलो न बोलो न ,
खुश्बू बन के आऊं,साँसों में बस जाऊं ,
कैसे तुमको मनाऊं ....



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Feb 9, 2011

५८ -ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर .....

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर ,बर्बाद न कर
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर ,बर्बाद न कर,

-ऐ इश्क न छेड़ आ आ के हमें ,हम भूले हुओं को याद न कर,
पहले ही बहुत नाशाद हैं हम तू और हमें नाशाद न कर,
क़िस्मत का सितम ही कम नहीं कुछ ,ये ताज़ा सितम ईजाद न कर,
यूँ ज़ुल्म न कर,बेदाद न कर...

-रातों को उठ उठ रोते हैं ,रो रो कर दुआयें करते हैं
आंखो में तसव्वुर दिल में खलिश ,सर धुनते हैं आहें भरते हैं
ऐ इश्क ये कैसा रोग लगा ,जीते हैं न ज़ालिम मरते हैं
इन ख्वाबों से यूँ आज़ाद न कर ,
ऐ इश्क हमें बर्बाद न कर
-जिस दिन से बंधा है ध्यान तेरा ,घबराए हुए से रहते हैं,
हर वक़्त तस्सवुर कर कर के शरमाये हुए से रहते हैं ,
कुम्हलाये हुए फूलों की तरह ,कुम्हलाये हुए से रहते हैं...
कामाल न कर बेज़ार न कर
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर .....
Poet-Akhtar Shirani

-शायर -मोहम्मद खान محمد داؤد خان, जिन्हें अख्तर शिरानी के नाम से लोग जानते हैं . شیرانی (takhallus Akhtar),
- 4 May 1905 को टोंक[राजस्थान]में जन्मे
इस शायर को आधुनिक रोमांटिक शायरी का एक स्तंभ माना जाता है.इन्हें ' شاعرِ رومان 'रोमांस का शायर' भी कहा गया है.इनके जीवन में दुखों ने इनका कभी साथ नहीं छोड़ा ,उन दुखों की इन्तहा तब हुई जब उन्हें इश्क़ में रुसवाईयाँ मिलीं जिस के बाद उन्होंने खुद को शराब में डुबो लिया और नतीजतन ९ सितम्बर को १९४८ में दर्दनाक मौत ने उन्हें गले लगा लिया .
उन्हीं के शब्दों में -
'दुनिया का तमाशा देख लिया ,गमगिन सी है बेताब सी है
उम्मिद यहां इक वहम सी है ,तस्किन यहां इक ख्वाब सी है
दुनिया में खुशी का नाम नहीं ,दुनिया में खुशी नायाब सी है
दुनिया में खुशी को याद न कर,ऐ इश्क हमें बर्बाद न कर ..
-उनकी लिखी यह ग़ज़ल नय्यारा नूर की आवाज़ में यह बेहद लोकप्रिय हुई थी .
-मैं ने एक कोशिश की है कि इस खूबसूरत शायरी के साथ पूरा न्याय कर सकूँ.
डाउनलोड या प्ले करें


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[ग़ज़ल के लिए लूप तैयार कर के देने के लिए मुजफ्फर नक़वी साहब को धन्यवाद.]