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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Feb 9, 2011

५८ -ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर .....

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर ,बर्बाद न कर
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर ,बर्बाद न कर,

-ऐ इश्क न छेड़ आ आ के हमें ,हम भूले हुओं को याद न कर,
पहले ही बहुत नाशाद हैं हम तू और हमें नाशाद न कर,
क़िस्मत का सितम ही कम नहीं कुछ ,ये ताज़ा सितम ईजाद न कर,
यूँ ज़ुल्म न कर,बेदाद न कर...

-रातों को उठ उठ रोते हैं ,रो रो कर दुआयें करते हैं
आंखो में तसव्वुर दिल में खलिश ,सर धुनते हैं आहें भरते हैं
ऐ इश्क ये कैसा रोग लगा ,जीते हैं न ज़ालिम मरते हैं
इन ख्वाबों से यूँ आज़ाद न कर ,
ऐ इश्क हमें बर्बाद न कर
-जिस दिन से बंधा है ध्यान तेरा ,घबराए हुए से रहते हैं,
हर वक़्त तस्सवुर कर कर के शरमाये हुए से रहते हैं ,
कुम्हलाये हुए फूलों की तरह ,कुम्हलाये हुए से रहते हैं...
कामाल न कर बेज़ार न कर
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर .....
Poet-Akhtar Shirani

-शायर -मोहम्मद खान محمد داؤد خان, जिन्हें अख्तर शिरानी के नाम से लोग जानते हैं . شیرانی (takhallus Akhtar),
- 4 May 1905 को टोंक[राजस्थान]में जन्मे
इस शायर को आधुनिक रोमांटिक शायरी का एक स्तंभ माना जाता है.इन्हें ' شاعرِ رومان 'रोमांस का शायर' भी कहा गया है.इनके जीवन में दुखों ने इनका कभी साथ नहीं छोड़ा ,उन दुखों की इन्तहा तब हुई जब उन्हें इश्क़ में रुसवाईयाँ मिलीं जिस के बाद उन्होंने खुद को शराब में डुबो लिया और नतीजतन ९ सितम्बर को १९४८ में दर्दनाक मौत ने उन्हें गले लगा लिया .
उन्हीं के शब्दों में -
'दुनिया का तमाशा देख लिया ,गमगिन सी है बेताब सी है
उम्मिद यहां इक वहम सी है ,तस्किन यहां इक ख्वाब सी है
दुनिया में खुशी का नाम नहीं ,दुनिया में खुशी नायाब सी है
दुनिया में खुशी को याद न कर,ऐ इश्क हमें बर्बाद न कर ..
-उनकी लिखी यह ग़ज़ल नय्यारा नूर की आवाज़ में यह बेहद लोकप्रिय हुई थी .
-मैं ने एक कोशिश की है कि इस खूबसूरत शायरी के साथ पूरा न्याय कर सकूँ.
डाउनलोड या प्ले करें



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[ग़ज़ल के लिए लूप तैयार कर के देने के लिए मुजफ्फर नक़वी साहब को धन्यवाद.]

14 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दरता से गाया है...वाह!! बधाई..

M VERMA said...

बहुत सुन्दर
सुन्दर स्वर

Anonymous said...

Kya baat hai, alpana ji..bahot din baad aap ko suna... aur special episode mein aap ko sunkar bahot acha laga... generally, baghair rythm ke gaana koi aasan kaam nahi.. laikin aap ne prove kardiya hai, ke koshish aur mehnat se kya nahi ho sakta... JO HAI KAM HAUSLA, KARTA HAI WO, SHIKWA MUQADDAR KA... JO BAA HIMMAT HAI SAHRA MEIN, KHAZANA DHOOND LETA HAI....

keep it up Regards
-Muftin

kshama said...

Geet ke bol behad khoobsoorat hain..aapki aawaz to nahi sun payi is waqt,par haan kuchh hi dinome zaroor sunugi!

kshama said...

Geet ke bol nihayat khoobsoorat hain...Is waqt sun nahi payi par jald hi sunungi.

Anonymous said...

Alpana Ji mein kafi urse se soch raha thaa ke aapne mujhse loop tu banwa liya laikin gaya nahi ab tuk. Aaj sunkar bohut khushi huee. Bohut umdah gaya hai khas taur pe kuch harkatein tu bohut he badhiya rahein. Aapne likha ke kuch critically likhun magar mein kiya karun meri nazar acchi cheezon ki taraf aisee padi ke bus overall aik khoobsurat effect bun gaya. Sirf pehli line mein jab "Barbaad Na Kar" dubara aaya tu "Kar" aapne kuch jaldi se keh diya. Iske illawa mujhe koi baat aisee nahi nazar aayee jo aapke control me thi aur aap adaa na kar saki hon. Iss tarha ki gaeyki aap per bohut suit kari. Iss mein taal ki restriction na hone ke bawajood aapne aik virtual tempo qayyam rakha. Bohut khoob aur haan shukriya ke aapne Nayyara Noor ki gayee aisee cheez sunaye jo mein ne pehle na suni thi,
-
-Muzaffar Naqvi

शेरघाटी said...

ख़ज़ाने से जिस हीरे को आपने लाया है वह आपकी आवाज़ और पेशकश से और रमक़ अंदाज़ हो गया है.

समय हो तो इस कविता नुमा अंश को पढ़ें ..
बाज़ार, रिश्ते और हम http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/2010/07/blog-post_10.html

शहरोज़

Kurshid said...

Excellent Singing Alpana Ji.
Mood, pronunciation and the concept of singing using a loop is simply outstanding.
Very sothing vocals....

Regards
Kurshid

Praveen said...

Hi Alpana,
Simply Outstanding performance..aapne is ghazal ko bahut hi practise kiya hai lagta hai..maza aa gaya sunke.
Aapki awaaz mein bahut dum hai!! aise hi kuch aur ghazalein try kijiye..
Keep singing and sharing.
Regards,

Praveen

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर सुंदर रचना का चुनाव और उतना ही खूबसूरती से गाया है. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

अल्पना वर्मा said...

आप सभी सुनकारों का बहत बहुत शुक्रिया.
प्रकाश जी आप ने अख्तर साहब की लिखी पूरी नज़्म यहाँ दे दी आप का बहुत बहुत आभार .मैं ने काफी ढूंढी थी लेकिन मिली नहीं थी.कहते हैं यह नज़्म उनके जीवन की दास्ताँ है.
आभार.

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर said...

अल्पना जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हैं .मुझे भी बहुत पसंद आई .आपकी आवाज़ भी बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छी गयी हैं आपने ग़ज़ल .

Wazif said...

If you ask me give you overall comments, I'd say "wonderful"... this is something new from you... only your voice was visible and all your ups downs and harkaten were visible... On Yaad, nashaad & bedaad in the start... your harkatein were awesome.
it was a beautiful singing... and keep bringing more like that.

-Wazif

Jayesh said...

Alpnaji,Kaisi hai aap, Sorry for late reply, aapko reply kafi dino ke bad de raha hu, aapke dono song maine sune, ae ishaq hame barbad - Alpnaji aapne is ghazal ko sur ke saath bakhubi pash kiya, sun raha tha tab koi badi classical singar ko sun raha hu aisa laga, sach me ghazal bhi khubsurat thi aur aapne ise nikhar diya, afsana song bhi aapne khubsurti se nibhaya, aapke parformance se lagta hai aap kafi riyaz karti hogi, keep it up, aur bhi riyaz kijiye aur apne song hamare saath share kijiye, Thanks & regards.......................jayesh