Apr 17, 2020

Kahin chand raaho mein kho gaya / ग़ज़ल



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कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई

मिरी दास्ताँ का उरूज था तिरी नर्म पलकों की छाँव में
मिरे साथ था तुझे जागना तिरी आँख कैसे झपक गई
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
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कभी  हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले
न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
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तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
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तिरे हाथ से मेरे होंट तक वही इंतिज़ार की प्यास है
मिरे नाम की जो शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई
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Kahin chand raaho mein kho gaya
Kahin chandni bhatak gayi
Kahin chand raaho mein kho gaya
Kahin chandni bhatak gayi
Main charag woh bhi bujha huaa
Main charag woh bhi bujha huaa
Meri raat kaise chamak gayi
Kahin chand raaho mein kho gaya
Kahin chandni bhatak gayi
Meri daatan ka huruj thaa
Teri narm palkoki chhanv mein
Meri daatan ka huruj thaa
Teri narm palkoki chhanv mein
Teri narm palkoki chhanv mein
Mere saath thaa tujhe jaagana
Teri aankh kaise jhapak gayi
Mere saath thaa tujhe jaagana
Teri aankh kaise jhapak gayi
Main charag woh bhi bujha huaa
Main charag woh bhi bujha huaa
Meri raat kaise chamak gayi
Kahin chand raaho mein kho gaya
Kahin chandni bhatak gayi
Kabhi hum mile to bhi kyaa mile
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Aug 6, 2019

ऐ ज़िंदगी, गले लगा ले/Ae zindagi gale


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 Swar : Alpana Verma

ऐ ज़िंदगी, गले लगा ले
हमने भी तेरे हर इक ग़म को
गले से लगाया है, है ना?
ऐ ज़िंदगी, गले लगा ले
ऐ ज़िंदगी
हमने बहाने से, छुपके ज़माने से
पलकों के परदे में घर भर लिया
हमने बहाने से, छुपके ज़माने से
पलकों के परदे में घर भर लिया
तेरा सहारा मिल गया है, ज़िंदगी
ला-ला-ला-ला-ला............
तेरा सहारा मिल गया है, ज़िंदगी
ऐ ज़िंदगी, गले लगा ले
ऐ ज़िंदगी, गले लगा ले
हमने भी तेरे हर इक ग़म को