पर्बतों के पेड़ों पर ....
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फिल्म-शगुन
संगीतकार-खय्याम
गीतकार-साहिर लुधयानवी
मूल गायक -सुमन कल्यानपुर और मो.रफ़ी
प्रस्तुत गीत में स्वर- सफीर अहमद और अल्पना वर्मा
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परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सूरमई उजाला है, चम्पई अंधेरा है
सूरमई उजाला है
१.दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
आसमान ने खुश होकर रंग सा बिखेरा है
आसमान ने खुश होकर........
२.ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
परबतों के पेड़ों पर................
३.क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
परबतों के पेड़ों पर....................
4.अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
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फिल्म-शगुन
संगीतकार-खय्याम
गीतकार-साहिर लुधयानवी
मूल गायक -सुमन कल्यानपुर और मो.रफ़ी
प्रस्तुत गीत में स्वर- सफीर अहमद और अल्पना वर्मा
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परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सूरमई उजाला है, चम्पई अंधेरा है
सूरमई उजाला है
१.दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
आसमान ने खुश होकर रंग सा बिखेरा है
आसमान ने खुश होकर........
२.ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
ठहरे-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
भीगे-भीगे झोंकों में खुश्बुओं का डेरा है
परबतों के पेड़ों पर................
३.क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
क्यूँ ना जज़्ब हो जाएँ इस हसीन नज़ारे में
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
परबतों के पेड़ों पर....................
4.अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों हो
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
जब से पा लिया तुम को सब जहाँ मेरा है
परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
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Waheeda &Kamaljeet 