भजन में स्वर : अल्पना वर्मा
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं ||
कौन कहते हैं भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
कौन कहते हैं भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
कौन कहते हैं भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
कौन कहते हैं भगवान नाचते नहीं
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं ||
Movie: The Burning Train Music: R D Burman Lyricist: Sahir Ludhianvi --------- तेरी है ज़मीन, तेरा आसमान, तू बड़ा मेहरबान, तू बक्शीश कर. सभी का है तू, सभी तेरे, खूदा मेरे तू बक्शीश कर..
तू चाहे तो हमें रखे, तू चाहे तो हमें मारे. तेरे आगे झुकाके सर, खड़े हैं आज हम सारे.
ओ सब से बड़ी ताक़त वाले, तू चाहे तो हर आफत टाले . तेरी मर्ज़ी से ऐ मालिक, हम इस दुनिया में आये हैं. तेरी रहमत से हम सब ने, ये जिस्म और जान पाए हैं.
तू अपनी नज़र हम पर रखना, किस हाल में हैं खबर रखना..
तेरी है ज़मीन, तेरा आसमान, तू बड़ा मेहरबान, तू बक्शीश कर. सभी का है तू, सभी तेरे, खुदा मेरे तू बक्शीश कर..
तेरी है ज़मीन, तेरा आसमान, तू बड़ा मेहरबान, तू बक्शीश कर. सभी का है तू, सभी तेरे, खुदा मेरे तू बक्शीश कर.. तेरी है ज़मीन,
प्रस्तुत है यह गीत -A Prayer -Vocals--Shahzad and Alpana . Music arranged by Mr.Shahzad.
This Song was suggested by Pandit D.K.Sharma'Vats'
Minus track and my vocals were mixed by Arvind Sharman in his mumbai recording studio.
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फ़िल्म : अंकुश
Original Singer: Pushpa Pagdhare, Sushma Sreshtha
Music Director: Kuldip Singh
Lyrics: Abhilash
-प्रस्तुत गीत में स्वर -अल्पना
इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न---
दूर अज्ञान के हों अँधेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचते रहें हम
जितनी भी दे भली ज़िन्दग़ी दे
बैर हो न, किसी का किसी से
भवना मन में बदले की हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न---
हम न सोचें हमें क्या मिला है
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाँटें सभी को
सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा का जल तू बहाकर
करदे पावन हरेक मनका कोना
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न----
[Lata Mangeshkar]
फ़िल्म - दो ऑंखें बारह हाथ (१९५७)
मूल गायिका - लता मंगेशकर
संगीतकार - वसंत देसाई
गीतकार -भरत व्यास
[यहाँ प्रस्तुत गीत मेरे स्वर में है. ]
ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हों हमारे करम,
नेकी पर चले और बदी से टले, ताकि हँसते हुए निकले दम।
1-ये अँधेरा घना छा रहा, तेरा इंसान घबरा रहा,
हो रहा बेखबर, कुछ-ना आता नज़र, सुख का सूरज छुपा जा रहा।
है तेरी रोशनी में जो दम, तू अमावस को कर दे पूनम्,
नेकी पर चले और बदी से टले, ताकि हँसते हुए निकले दम।
2-जब जुल्मों का हो सामना, तब तू ही हमें थामना,
वो बुराई करें, हम भलाई करें, नहीं बदले की हो कामना।
बढ उठे प्यार का हर कदम, और मिटे बैर का ये भरम,
नेकी पर चले और बदी से टले, ताकि हँसते हुए निकले दम। 'आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएँ' डाउनलोड/ प्ले Click Here
फिल्म---काजल मूल गायिका---आशा भोंसले संगीत---रवि गीत----साहिर लुधयानवी
तोरा मन दर्पण कहलाये भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाए
1-मन ही देवता मन ही इश्वर मन से बड़ा न कोई मन उजियारा ,जब जब फैले जग उजियारा होए इस उजाले दर्पण पर प्राणी, धूल ना जमने पाए तोरा मन दर्पण कहलाये .......
2-सुख की कलियाँ, दुःख के कांटे मन सब का आधार मन से कोई बात छुपे न मन के नैन हजार जग से चाहे भाग ले कोई मन से भाग न पाये तोरा मन दर्पण कहलाये ......