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Aug 10, 2017

साज़-ए-दिल छेड़ दे -फ़िल्म: पासपोर्ट (1961) Saaze Dil chhed de

फ़िल्म: पासपोर्ट (1961)
 मूल गायक: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: फारुख कैसर

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प्रस्तुत गीत में स्वर -सफ़ीर  और अल्पना
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Saaze Dil chhed de-
Lyrics :


साज़-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
साज़-ए-दिल छेड़ दे …

मुझे चाँद क्यूँ तकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक़ यही होता है
मेरे चाँद से जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …

तेरे दर पे सर झुक जाए
यहीं ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर ग़मी न आए
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …
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Aug 9, 2017

अच्छा जी, मैं हारी .... ..काला पानी (1958) Achcha ji main haari

अच्छा जी, मैं हारी .... ..
फिल्म-काला पानी (1958)
संगीतकार -एस.डी.बर्मन
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायक -मो.रफ़ी, आशा भोसले
प्रस्तुत गीत में स्वर - अल्पना और सफ़ीर
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गीत के बोल
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अच्छा जी मैं हारी, चलो, मान जाओ ना
देखी सबकी यारी, मेरा दिल, जलाओ ना

१.छोटे से क़ुसूर पे, ऐसे हो खफ़ा
रूठे तो हुज़ूर थे, मेरी क्या खता
देखो दिल ना तोड़ो,छोड़ो हाथ छोड़ो
छोड़ दिया तो हाथ मलोगे, समझे..
अजी समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

२.जीवन के ये रास्ते, लम्बे हैं सनम
काटेंगे ये ज़िंदगी, ठोकर खा के हम
ज़ालिम साथ ले ले ,अच्छे हम अकेले
चार कदम भी चल न सकोगे, समझे?हाँ ,समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

३.जाओ रह सकोगे ना, तुम भी चैन से
तुम तो खैर लूटना जीने के मज़े
क्या करना है जी के,हो रहना किसी के
हम ना रहे तो याद करोगे, समझे?समझे!
अच्छा जी मैं हारी, चलो...
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Mar 26, 2017

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे-फ़िल्म-गेटवे ऑफ़ इंडिया [1957] Do ghadi wo jo paas

फ़िल्म-गेटवे ऑफ़ इंडिया [1957]
संगीतकार - मदन मोहन
गीतकार -राजेंद्र कृष्ण
मूल गायक - मोहम्मद रफी लता मंगेशकर

Dec 27, 2012

गुज़रा हुआ ज़माना ..


Film-Shirin Farhad
गुज़रा हुआ ज़माना

फिल्म-शीरीं-फरहाद [१९५८]

संगीतकार-एस.मोहिंदर

गीतकार-तनवीर नक़वी

मूल गायिका-लता मंगेशकर




गीत के बोल-


गुज़रा हुआ ज़माना, आता नहीं दुबारा
हाफ़िज़ खुदा तुम्हारा

१) खुशियाँ थीं चार दिन  की ,आँसू हैं उम्र भर के
तन्हाइयों में अक़्सर रोएंगे याद कर के
दो वक़्त जो कि हमने इक साथ है गुज़ारा
हाफ़िज़ ...

२) मेरी क़सम है मुझको तुम बेवफ़ा न कहना
मजबूर थी मुहब्बत सब कुछ पड़ा है सहना
टूटा  है ज़िन्दगी का अब आखिरी सहारा
हाफ़िज़ ...

३) मेरे लिये सहर भी आई है रात बन कर
निकला मेरा जनाज़ा मेरी बारात बन कर
अच्छा हुआ जो तुमने देखा न ये नज़ारा
हाफ़िज़ ...
प्रस्तुत कवर गीत ---स्वर-अल्पना ---
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