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Apr 8, 2018

रोज़ शाम आती थी ..Roz Sham aati thi...

फ़िल्म: इम्तिहान (1974)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
 गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
Original गायिका: लता मंगेशकर

Cover Sung by Alpana Verma

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रोज़ शाम आती थी, मगर ऐसी न थी
रोज़- रोज़ घटा छाती थी, मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी...
1.डाली में ये किसका हाथ, कर इशारे बुलाए मुझे झूमती चंचल हवा, छू के तन गुदगुदाए मुझे
हौले-हौले, धीरे-धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए, खुली आँख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी...

2.अरमानों का रंग है, जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस-हँस के है देखती,जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े, जिस ओर भी जाती हूँ मैं डगमगाती हूँ मैं, दीवानी हुई जाती हूँ मैं...

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी...
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Mar 2, 2017

वो हैं ज़रा खफ़ा खफा -फिल्म: शागिर्द [१९६७]

फिल्म-शागिर्द [१९६७]
संगीतकार -लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
गीतकार -मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायक -लता मंगेशकर और मो. रफ़ी

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Singers of this version- Safeer and Alpana
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वो हैं ज़रा खफा ख़फा तो नैन यूँ चुराए हैं
के हो ...ना बोल दूँ तो क्या करूँ
वो हँस के यूँ बुलाए हैं..के हो

१.हँस रही है चांदनी
मचल के रो ना दूँ कहीं
ऐसे कोई रूठता नहीं
ये तेरा ख़याल है
करीब आ मेरे हसीं
मुझको तुझसे कुछ गिला नहीं
बात यूँ बनाए हैं
के हो..
2.फूल को महक मिले
ये रात रंग में ढले
मुझसे तेरी जुल्फ गर खुले
तुम ही मेरे संग हो
गगन की छाँव के तले
ये रुत यूँ ही भोर तक चले
प्यार यूँ जताए हैं
के हो…
3.ऐसे मत सताइए
ज़रा तरस तो खाइए
दिल की धड़कन मत जगाइए
कुछ नहीं कहूँगा मैं
ना अन्खड़ियाँ झुकाइए
सर को काँधे से उठाइये
ऐसे नींद आये है
के हो..हो.....
वो हैं ज़रा खफा ख़फा...............
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Feb 15, 2017

ढल गया दिन हो गयी शाम -फिल्म : हमजोली [१९७०]

फिल्म : हमजोली [१९७०]
गीतकार-आनंद बक्षी
संगीतकार-लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल
मूल गायक -मो .रफ़ी और आशा भोसले
अभिनेता जीतेन्द्र और लीना चंद्रावरकर पर   फिल्माया गया

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  Sung by Safeer & Alpana
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ढ़ल  गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है..
अभी अभी तोआई हो अभी अभी जाना है
ढ़ल गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है
अभी अभी तो आई हो अभी अभी जाना है
ढ़लगया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है

१-सितम मेरे दिल पे जो ढाए कसम लगे उसको मेरी जो जाए..
ना ऐसे  देखो मुझे ना टोको ज़रा यह सोचो बुरा ज़मान है
ढ़ल गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है

2-गुज़ारी साथ हमने कई रातें  ना जाने कब ख़तम होगी तेरी बातें ..
अभी ना जाना कोई तराना कोई फ़साना अभी सुनना है
ढ़ल गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है.......

3-बनाते हो यह रोज ही बहाना ना जाने ना देगा आज यह दीवाना..
माना जी माना  तू है दीवाना मेरा दीवाना बड़ा सयाना है
ढ़ल गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है
अभी अभी तो आई हो अभी अभी जाना है
ढ़ल गया दिन हो गयी शाम जाने दो जाना है...
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Feb 11, 2017

रात सुहानी जाग रही है --फिल्म:जिगरी दोस्त ( १९६९ )


रात सुहानी जाग रही है ( जिगरी दोस्त - १९६९ )
संगीत : लक्ष्‍मीकांत प्यारेलाल
गीत :आनंद बक्शी
मूल  गायक :मो. रफी और सुमन कल्यानपुर
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Cover singers-Safeer & Alpana
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Song Lyrics-
रात सुहानी जाग रही है
धीरे-धीरे चुपके -चुपके,  चोरी-चोरी हो
प्रेम कहानी जाग रही है
 धीरे-धीरे चुपके -चुपके,  चोरी-चोरी हो

१.चल रहे हैं जादू थम गया ज़माना
दिल चुरा रहा है ये समान सुहाना
पालकी चमन में फूलों की उतार के
ये बहार गा रही है गीत प्यार के ओ
और जवानी जाग रही है धीरे-धीरे

2.चाँद कर रहा है प्यार के इशारे
ये हमारे नयना बन गये हैं तारे
नींद ने ना आने की उठाई है क़सम
नींद कैसे आये मन के द्वार पे सनम
प्रीत दीवानी जाग रही है धीरे-धीरे चुपके -चुपके,  चोरी-चोरी हो

3.नाम इस जहाँ का चाँदनी से पूछो
आ गये कहाँ हम ये किसी से पूछो
ये ज़मीन लग रही है आसमां सी
दिल की धड़कनों में पड़ गयी है तान सी ओ
ज़िंदगानी जाग रही है धीरे-धीरे
चुपके -चुपके,  चोरी-चोरी हो.....
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Jan 19, 2017

जब आती होगी याद मेरी--फिल्म-फांसी

फिल्म-फांसी
गीतकार- आनंद बक्षी
संगीतकार-लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल
मूल गायक-मो. रफ़ी और सुलक्षणा पंडित
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कवर गायक - सफ़ीर और अल्पना
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गीत के बोल -
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जब आती होगी याद मेरी -2
तेरा दिल तो मचलता  होगा

तू भी तो मुझे. मिलने को -2
दिन रात तड़पता होगा .
जब आती होगी याद मेरी
हाय जब आती होगी याद मेरी ..

१....लिखे तो होंगे ख़त मुझको
पर डाक में न डाले होंगे के मुझको दिखाने के लिए तूने सब वो संभाले होंगे

बरसों न मेरा ख़त पाकर तू ठंडी आहें तो .भरता हो~~गा...
जब आती होगी याद मेरी...हाय जब आती होगी याद मेरी .

2.ख़यालों में तू मुझको लाके करता तो होगा दिलजोई
 करता तो होगा दिलजो~ई
ये भी तो कभी सोचता हो.गा -2
लेजाये न मुझे और को~ई
किसी और की  होने के डर  से तेरा दिल भी  धड़कता होगा

जब आती होगी याद मेरी -2.
तेरा दिल तो मचलता  होगा

तू भी तो मुझे मिलने को -2
दिन रात तड़पता होगा .
[एक साथ ]जब आती होगी याद मेरी हाय जब आती होगी याद मेरी I

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Jan 18, 2017

मेरी साँसों को जो महका रही है

फिल्म- बदलते रिश्ते   [१९७८ ]
गीतकार : आनंद बक्षी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
मूल गायक- महेंद्र कपूर  और लता

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कवर गायक- सफ़ीर और अल्पना
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गीत के बोल
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मेरी साँसों को जो महका रही है
मेरी साँसों को जो महका रही है
ये पहले प्यार की खुशबू
तेरी साँसों से शायद आ रही है

१.शुरू ये सिलसिला तो उसी दिन से हुआ था
अचानक तूने जिस दिन मुझे यूँ ही छुआ था
लहर जागी जो उस पल तनबदन में
वो मन को आज भी बहका रही है

2.बहुत तरसा है ये दिल तेरे सपने सज़ा के
ये दिल की बात सुन ले, मेरी बाहों में आके
जगाकर अनोखी प्यास मन में
ये मीठी आग जो दहका रही है

3.ये आँखे बोलती हैं, जो हम ना बोल पाए
दबी वो प्यास मन की नज़र में झिलमिलाए
होठों पे तेरे हल्की सी हँसी है
मेरी धड़कन बहकती जा रही है
ये पहले प्यार की खुशबू .....मेरी साँसों को जो...

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Jul 1, 2014

ओ घटा साँवरी....


फिल्म-अभिनेत्री
मूल गायिका -लता मंगेशकर
संगीतकार-लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल
गीतकार -मजरूह सुल्तानपुरी

गीत -
ओ घटा सांवरी, थोड़ी थोड़ी बावरी, हो गयी हैं बरसात क्या!
हर साँस है बहकी हुई, अब की बरस है ये बात क्या!
हर बात है बहकी हुई, अब की बरस  है ये बात क्या!

1-पा के अकेली मुझे, मेरा आँचल मेरे साथ उलझे
छू ले अचानक कोई, लट में ऐसे मेरा हाथ उलझे
क्यो रे बादल तू ने छूआ  मेरा हाथ क्या?

2-आवाज़ थी कल यही, फिर भी ऐसे लहकती ना देखी
पग में थी पायल मगर, फिर भी ऐसे छनकती ना देखी
चंचल हो गये घुँगरू मेरे रातोरात क्या!

3-मस्ती से बोझल पवन, जैसे साया कोई मन पे डोले
बरखा की हर बूँद पे, थरथरी सी मेरे तन पे डोले
पागल मौसम जा रे तू, लगा मेरे साथ क्या!
 ओ घटा सांवरी, ......
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Cover song---Vocals- Alpana
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Apr 12, 2013

जब भी जी चाहे नई दुनिया..स्वर -अल्पना


फिल्म-दाग़
संगीतकार -लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार-साहिर लुध्यानवी.
मूल गायिका-लता मंगेशकर
प्रस्तुत गीत कवर संस्करण है -स्वर-अल्पना

जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग.

याद रहता है किसे गुज़रे ज़माने का चलन,
सर्द पड़ जाती है चाहत, हार जाती है लगन,
अब मोहब्बत भी है क्या इक तिजारत के सिवा,
हम ही नादां थे जो ओढ़ा बीती यादों का क़फ़न,
वरना जीने के लिए सब कुछ भुला लेते  हैं लोग.

जाने वो क्या लोग थे जिनको वफ़ा का पास था,
दूसरे के दिल पे क्या गुज़रेगी ये एहसास था,
अब हैं पत्थर के सनम जिनको एहसास ना गम ,
वो ज़माना अब कहाँ जो अहल-ए-दिल को रास था,
अब तो मतलब के लिए नाम-ए-वफ़ा लेते हैं लोग..

जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग...
...Difficult song....tried my best..
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Cover song.....sung by Alpana

Mar 21, 2013

जा रे कारे बदरा ...फिल्म-धरती कहे पुकारे के.

Nanda

संगीतकार -लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
फिल्म-धरती कहे पुकार के [१९६९]
मूल गायिका-लता मंगेशकर

प्रस्तुत गीत कवर संस्करण है.

Lyrics-
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार..
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझे रे प्यार

1-किन की पलक से पलक मोरी उलझी
निपट अनाड़ी से लट मोरी उलझी
के लट उलझा के मैं तो गई हार
वो हैं ऐसे ...
जा रे कारे ..

2-अंग उन्ही की लहरिया समायी
कबहूँ न पूछे लूँ काहे अंगडाई
के सौ-सौ बल खा के मैं तो गई हार
वो हैं ऐसे ..

3-थाम लो बैयाँ चुनर समझावे
गरबा लगा लो कजर समझावे
के सब समझा के मैं तो गई हार
वो हैं ऐसे ....
जा रे कारे बदरा बलमा के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझे रे प्यार

Cover song -स्वर----अल्पना
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Dec 22, 2012

सजना ओ सजना -फिल्म-अभिनेत्री

सजना ओ सजना कहे सुन क्या....

गीत फिल्म अभिनेत्री से है.
संगीतकार --लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गीतकार--मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायिका -लता मंगेशकर
...............
कवर संस्करण--स्वर-अल्पना
To play or download click here-


Dec 21, 2012

जो मैं चली फिर न मिलूंगी ...

संध्या 
गीत-

जो मैं चली फिर न मिलूंगी,
खो जाऊँगी मैं कहीं साजन मुझे आने दे या मेरे पास तू आ जा,,,,,,
जो मैं चली ...

आसूओं से जलते आकाश में अकेली ,डोलती हूँ तूफानों में कब से मैं अलबेली ,
दूर....ही से तुझको निहारे तेरी बिरहन मुझे आने दे या मेरे पास तू आजा.....

जो मैं चली ....
मैं लिए  tadpungi  ये आहों की माला ,फूंक डाले तन मेरा चाहे बिरहा की ज्वाला..
राख बन के   lipatungee तुझ से मेरे साजन मुझे आने दे.या मेरे पास तू आ जा....
जो मैं चली फिर न मिलूंगी..
................................

१९७१ में आयी एक क्लासिक फिल्म 'जल बिन मछली,नृत्य बिन बिजली' व्ही .शांताराम जी की एक बेहद खूबसूरत और नायब  फिल्म है.
मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक इस फिल्म का हर पक्ष प्रशंसनीय है चाहे वह कलाकरों की अदाकारी हो या निर्देशन या फोटोग्राफी या फिर गीत-संगीत.

जितनी बार देखें-सुने  मन नहीं भरता !  .खासकर संध्या का नृत्य ..
एक पाँव पर बैसाखी के साथ जो उन्होंने परफोर्मेंस दी है वह लाजवाब है!
इस के सभी गीत एक से बढ़कर एक हैं ,आज एक गीत मैं अपने स्वर में सुनना चाह रही हूँ --जो अभिनेत्री संध्या पर फिल्माया गया है.गीत की मूल गायिका लता जी हैं और संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल जी का है.
इस के बोल मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे हुए हैं ..सुन कर बताएँ कि मेरा यह प्रयास कैसा रहा ?

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---------------स्वर-अल्पना -Cover song-

Nov 11, 2012

दिए जलाएँ प्यार के..


'दिए जलाएँ प्यार के  चलो इसी खुशी में ,
बरस बिता के आई है ये शाम ज़िंदगी में '
दीपावली की शुभकामनाओं के साथ एक गीत ..फिल्म धरती कहे पुकार के..
मूल गायिका -लता जी.
संगीत-लक्ष्मी कान्त प्यारेलाल.
गीत-मजरूह सुल्तानपुरी
Presenting cover song
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Sep 18, 2012

ये कैसा ग़म सजना..

Ye kaisa gham Sajna..
कवर गीत -:
Cover song-
Original Singer-Lata
Film-Pyasi Shaam [1969]
Lyrics-Majhrooh Sultanpuri
Music-Laxmikat Pyarelal
Picturised on Sharmila Tagore
Vocals-Alpana



Sep 7, 2012

खबर मोरी ना लीन्ही रे, बहुत दिन बीते '

[Painting by Raja Ravi Verma]
''खबर मोरी न लीन्ही रे,बहुत दिन बीते
फिल्म-संत ज्ञानेश्वर ,
गीत-भरत व्यास  ,
संगीत-लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
मूल गायिका -लता मंगेशकर.

प्रस्तुत है कवर संस्करण..स्वर-अल्पना

एक प्रयास...


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Jul 27, 2012

मेरा नाम है चमेली --Cover song

Kumkum

मेरा नाम है चमेली , मैं हूँ मालन अलबेली,
चली  आई मैं अकेली बीकानेर से..

यह गीत आज भी  अन्ताक्षरी में' म 'से गाया जाने वाला पहला गीत हुआ करता है.
शायद बहुत ही हिट रहा होगा अपने समय में!

फिल्म-राजा और रंक 
मूल गायिका -लता जी 
संगीतकार-लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल 
गीत-आनंद  बक्षी 
अभिनेत्री  --कुमकुम 


Cover version by Alpana 

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Jan 28, 2012

हम कश्मकशे ग़म से [just vocals]

हम कश्मकशे ग़म से गुज़र क्यूँ नहीं जाते..


फिल्म-फ्री लव [१९७४]..गीतकार -असद भोपाली.
मूल  गायिका लता जी....यह एक ऐसा गीत है जिसे शायद लोग भूल चुके हैं या उन्होंने सुना भी नहीं होगा.
लेकिन लता जी के गाये दर्द भरे गीतों में यह एक बेहतरीन गीत माना  जा सकता है .जिसे उतनी लोकप्रियता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी ..साहिर साहब के लिखे गीत तंग आ चुके हैं कश्मकशे जिंदगी से हम 'का बराबर मुकाबला करती है असद भोपाली साहब की लिखी यह ग़ज़ल.
मैं बिना किसी संगीत के इस ग़ज़ल को यहाँ सुना  रही हूँ....




 स्वर-अल्पना

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