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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Aug 18, 2010

५७ -वक़्त ने किया क्या हसीं सितम


'वक़्त ने किया क्या हसीं सितम ,तुम रहे तुम हम रहे हम 'फिल्म कागज के फूल [१९५९]के लिए गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा और सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में गीता जी ने गाया था.इसे अदाकार वहीदा रहमान और गुरु दत्त पर फिल्माया गया था.

यह गीत किसी परिचय का मोहताज नहीं है.गीता दत्त जी के गाये इस गीत को कई गायकों ने अपनी आवाज़ में दोबारा गाया.मगर गीता जी का जादू फ़िर कभी दोहराया नहीं गया.वह आज तक मूल गीत में कायम है और अनछुआ है।

मैं इस गीत को कभी गाने की जुर्रत न करती क्योंकि मेरी नज़र में यह अतुलनीय है,अनमोल है लेकिन गायक हर्षण नाम्ब्यार जी के सुझाव पर एक कोशिश की है।

जो भी गीत हम यहाँ गा रहे हैं उनके ट्रेक बने बनाये होते हैं और गीत को निभा सकना भी सीमित हो जाता है।इसलिए इस कोशिश को उसी के मद्दे नज़र तोलियेगा.
Click here to Play or download Mp3
'वक़्त ने किया क्या हसीं सितम'[कवर संस्करण ]
[स्वर-अल्पना ]


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20 comments:

kshama said...

Is geetne bhi kya,kya sitam dhaye hain!

Anonymous said...

Alpana ….
kudos for trying this song. Beautifully done and you have also felt the song as you sang it….
loved it overall.
-Harshan Nambiar

इस्मत ज़ैदी said...

waah!
bahut sundar!
aap ke blog kee list men se lagbhag saare hee gaane sune hain main ne bahut achchha gaati hain aap
badhaai!

नीरज गोस्वामी said...

अल्पना जी आपकी कोशिश बहुत दिलकश है...गीता दत्त तो खैर गीता दत्त ही थीं वैसी आवाज़ अब कहाँ सुनाई देती है...आपने बहुत सार्थक कोशिश की हैं उन जैसा गाने की और हद तक ल्काम्याब भी हुई हैं...बधाई स्वीकार करें...
ये फिल्म...ये गीत...और...इसका फिल्मांकन अद्भुत है...और मुझे अत्यंत प्रिय.
नीरज

Anonymous said...

Alpana Ji ...... Aap ki song selection pe hi fida ho gaye hum tou :) ..... Song ki jo feel honi chahiye thi woh mujhay mili is song main, baqi aapki singing ko tu sab hi mantay aur jantay hain ........ Mai nai ik ik line enjoy ki is song ki .
Regards, Leo

M VERMA said...

आपकी आवाज और सुर ..
बेहतरीन .. लाजवाब

P.N. Subramanian said...

"बेकरार दिल इस तरह मिले जिस तरह कभी हम जुदा न थे" हुंह , अच्छी बन पड़ी है!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर. इस तरह के गीत ही तो हैं जो सदियों गाए-गुनगुनाए जाएंगे.

Anonymous said...

Alpana Ji, mujhe iss gane mein bhav moujood lage. Sun ne mein accha laga.
Aapki pasand aur gane ka andaz bohut accha hai!
-rbhave

अजय कुमार said...

सुंदर प्रस्तुति ।

Rajendra Swarnkar said...

अल्पना जी

मन उदास था …
और उदास हो गया ,
आपके दर्द भरे सुरों की सरिता में डूब कर !


तुम भी खो गए , हम भी खो गए ,
एक राह पर चल'के दो क़दम


… और बस , खोता ही जा रहा हूं …


- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

Anonymous said...

YOU HAVE DONE A GOOD JOB ALPANA KEEP GOING FRIEND…
-Syed Ahmed

Anonymous said...

Alpana ji, You have a beautiful voice. No doubt at all! Awesome singing.
I really enjoyed listening to this.
What a song...and beautifully sung.Thanks for sharing.
-Rajiv[rsaddy]
US

Parasmani said...

One of your best! Enjoyed it!

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

बहुत सुन्‍दर, धन्‍यवाद.

Anonymous said...

Kitna khul kar aur kitna comfortably gaya hai aapne Alpana Ji. Agar aap na likhtein tu mujhe ehsaas bhi na hota ke aapne scale aik niche drop kiya hai. Bus yehi meri doston se request hai uss scale mein gao jahan khud ko comfortable mehsoos karo. Ye original tracks humare jaise singers ke liye nahi balke Maestros ke liye banay thay. Agar Khuda ne pitch di hai tu zaroor original mein gao laikin agar aisa nahi hai tu phir khud ko ruswa na karwao. Track bohut achha nahi thaa laikin aapne apni salahiyat dikhla di. Shukriya aapne meri baat ka maan rakha aur iss khoobsurat geet ko ga kar haq adaa kar diya. Bohut umdah.

-Muzaffar Naqvi

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अल्पना जी, हम तो आपके पास सिर्फ एक फरमाईश लेकर आए हैं कि समय मिले तो अपनी मधुर आवाज में ये गीत, जिसके बोल हैं "तूं न चला तो चल देंगी राहें, तुझको चलना होगा" जरूर सुनाईएगा....हमारा तो इस गीत के साथ कुछ ऎसा लगाव सा है कि सैकडों हजारों बार सुनने के बाद भी मन नहीं भरता...बल्कि मन को विचलित करने वाले किन्ही क्षणों में तो इस गीत नें सदैव कल्पौषधी का काम किया है.....
धन्यवाद....

ज्योति सिंह said...

तेरे रंग मे रंगा है ये मन ,वाह रे वाह ,गीत की तारिफ़ गीत के ही बोल से क्योकि हर गाने तो अपनी ही पसन्द के है ,कभी सामने भी सुन पाउ तो मजा आ जाये ,मगर तमन्ना तो तमन्ना ही होती है मुमकिन आसानी से नही होती .....बंगला मे कहते है इसे मिष्ठी गला .

Dr.R.Ramkumar said...

मैं इस गीत को कभी गाने की जुर्रत न करती क्योंकि मेरी नज़र में यह अतुलनीय है,अनमोल है लेकिन गायक हर्षण नाम्ब्यार जी के सुझाव पर एक कोशिश की है।
जो भी गीत हम यहाँ गा रहे हैं उनके ट्रेक बने बनाये होते हैं और गीत को निभा सकना भी सीमित हो जाता है।इसलिए इस कोशिश को उसी के मद्दे नज़र तोलियेगा.


अल्पना जी !
आप ठीक कहती हैं।
यह सही है कि ट्रेक पर गाना एक मुश्किल कवायद है क्योंकि हमें निभाना होता है अपनी स्वतंत्रता को ताक पर रख कर ..गीता जी के साथ आपने न्याय किया है और अपनी अस्मिता और निजता जीवित रखी है..

Anonymous said...

beautiful song and very good voice Alpana
very nicely sung
-Saroj Nair