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Jul 22, 2013

रातों के साये घने ..Cover version

जया भादुड़ी -फिल्म -अन्नदाता 
फिल्म-अन्नदाता
गीतकार-योगेश
संगीतकार -सलील चौधरी ,मूल गायिका -लता मंगेशकर

रातों के साये घने जब बोझ दिल पर बने
 न तो जले बाती न हो कोई साथी,
 फिर भी न डर अगर बुझे दिए
 सहर तो है तेरे लिये....

१-जब भी मुझे कभी कोई जो ग़म घेरे,
लगता है होंगे नहीं सपने यह पूरे मेरे ,
कहता है दिल मुझको माना हैं ग़म तुझको,
फिर भी न डर अगर बुझे दिए ,
सहर तो है तेरे लिये...

२-जब न चमन खिले मेरा बहारों में
जब डूबने मैं लगूँ रातों की मझधारों में
मायूस मन डोले पर यह गगन बोले
फिर भी न डर अगर बुझे दिए
सहर तो है तेरे लिये.....

३-जब ज़िन्दगी किसी तरह बहलती नहीं
खामोशियों से भरी जब रात ढलती नहीं
तब मुस्कुराऊँ मैं यह गीत गाऊँ मैं
फिर भी न डर अगर बुझे दिए
सहर तो है तेरे लिये....

रातों के साये घने जब बोझ दिल पर बने
न तो जलें बाती न हो कोई साथी \- २
फिर भी न डर अगर बुझे दिए
सहर तो है तेरे लिये....

एक प्रेरक गीत .
यह गीत मुझे बेहद पसंद है.गीत के बोल बहुत ही खूबसूरत हैं और संगीतकार सलील दा ने इसकी धुन भी लाजवाब बनाई है.इसकी  संगीत रचना कठिन है .

Cover version -Sung by Alpana -Download Mp3 Or Play here