Featured Post

खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Jul 14, 2011

जाने क्या तूने कही



फ़िल्म - प्यासा, 
मूलगायिका  - गीता दत्त,
संगीत - एस डी बर्मन,

गीत -

जाने क्या तूने कही
जाने क्या मैने सुनी
बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या तूने कही ...
सनसनाहट सी हुई,थरथराहट सी हुई
जाग उठे ख्वाब कई,बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या तूने कही ...
नैन झुक झुक के उठे,पाँव रुक रुक के उठे
आ गयी जान नई,बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या तूने कही ...
ज़ुल्फ़ शाने पे मुड़ी,एक खुशबू सी उड़ी
खुल गये राज़ कई,बात कुछ बन ही गयी
जाने क्या तूने कही ... मेरे स्वर में-


Click here to Download Or Play mp3

5 comments:

रश्मि प्रभा... said...

baat kuch ban hi gai....

himkar said...

लाजवाब! बार-बार सुनने को दिल चाहता हैं.
गीता ने हर गीत को डूबकर गाया और सुननेवालों को मन्त्र मुग्ध कर दिया. किसी ने क्या खूब कहा है गीता गले से नहीं दिल से गातीं थीं.
आपकी गायकी में भी वही बात नजर आती है.

प्रवीण पाण्डेय said...

अहा, बहुत भाता है यह गीत।

प्रकाश गोविन्द said...

क्या बात है......बहुत खूब
बाकी मेरे दिल की बात हिमकर जी ने कह ही दी है
-
-
शुभ कामनाएं

ताऊ रामपुरिया said...

अत्यंत सुंदर और काल जयी गीत का चुनाव आपकी आवाज में सुनना बहुत सुखद लगा.

रामराम.