Featured Post

एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Jul 21, 2011

जुर्म-ए-उल्फत पे हमें ....


जुर्म-ए-उल्फत पे हमें ....[ केवल स्वर ]
फिल्म--ताजमहल ,
शायर-साहिर लुध्यानवी
संगीत -रोशन

जुर्म-ए -उल्फत पे हमें  लोग सज़ा देते हैं ,
कैसे नादां है, शोलों  को हवा देते हैं
कैसे नादां हैं...

हमसे दीवाने कहीं  तर्के वफ़ा करते हैं ..
जान जाए के रहे बात निभा देते हैं
जान जाए....

तख़्त क्या चीज़ है और लाल-ओ-जवाहर क्या हैं..
इश्क वाले तो खुदाई भी लुटा देते हैं
जुर्म-ए -उल्फत पे हमें  लोग सज़ा देते हैं .
 mp3 download or Play

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ा ही सुन्दर गाया है आपने।

ज्योति सिंह said...

geet aur swar dono hi sundar ,do mahine baad net par aai tumahari itni saari post dekhi samya se nahi aa saki iska afsos bhi hai .