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झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Jul 25, 2011

क्यूँ ज़िन्दगी की राह में

दीप्ती नवल-फिल्म :साथ- साथ

फिल्म : साथ-साथ [१९८४]
गीतकार-जावेद अख्तर
संगीत-कुलदीप सिंह

क्यूँ ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए,
इतने हुए करीब की हम दूर हो गए,

१-ऐसा नहीं के हमको कोई ख़ुशी नहीं ,
लेकिन ये ज़िन्दगी भी कोई ज़िन्दगी नहीं,

क्यूँ इसके फैसले हमें मंज़ूर हो गए,इतने हुए करीब ....

२-पाया तुम्हें तो ऐसा लग तुमको खो दिया,
हम दिल पे रोये और ये दिल हम पे रो दिया,

पलकों से ख्वाब क्यूँ गिरे क्यूँ चूर हो गए,इतने हुए करीब...

[प्रस्तुत है कवर गीत --स्वर-अल्पना]

6 comments:

रश्मि प्रभा... said...

waah

kshama said...

Sundar geet....sundar aawaaz!

प्रवीण पाण्डेय said...

अर्थपूर्ण गीत।

कविता रावत said...

purane gano ka koi jawab nahi...
jab man udas ho to aise gaane bahut rulate hain...

ताऊ रामपुरिया said...

क्यूं जिंदगी की राह में.... बहुत ही उम्दा चयन और सुंदर गायन, शुभकामनाएं.

रामराम.

ज्योति सिंह said...

aesa geet jo mujhe bahut priya hai ,tumare gaane to apni pasand ke hote hai ,magar waqt ki kami ke karan sukoon se sun nahi paa rahi .