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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Dec 10, 2011

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी...


तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी हैरान हूं मैं
हैरान हूं मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूं मैं
परेशान हूं मैं

जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द संभालने होंगे
मुस्कुराएं तो मुस्कुराने के कर्ज़ उतारने होंगे
मुस्कुराऊं कभी तो लगता है, जैसे होंठों पर कर्ज़ रखा है

आज अगर भर आई हैं बूंदें बरस जाएंगीं
कल क्या पता किनके लिए आंखें तरस जाएंगी
जाने कब गुम हुआ कहां खोया एक आंसू छुपा के रखा था।
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी...
फिल्म-मासूम, गीत--गुलज़ार,संगीत-
मूल गीत -लता ..अभिनेत्री -शबाना आज़मी
प्रस्तुत है कवर संस्करण --स्वर- -अल्पना

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