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May 5, 2011

तेरी आंखों के सिवा -Cover Version


फिल्म : चिराग
संगीतकार : मदन मोहन
गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायिका :लता

cover version-Alpana

तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
ये उठें सुबह चले, ये झुकें शाम ढले
मेरा जीना मेरा मरना इन्हीं पलकों के तले
तेरी आँखों के सिवा ...

1-ये हों कहीं इनका साया मेरे दिल से जाता नहीं
इनके सिवा अब तो कुछ भी नज़र मुझको आता नहीं
ये उठें सुबह चले ...

2-ठोकर जहाँ मैने खाई इन्होंने पुकारा मुझे
ये हमसफ़र हैं तो काफ़ी है इनका सहारा मुझे
ये उठें सुबह चले ...
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

मेरी आवाज़ में सुनिये ये गीत-:
Recorded in July 2008



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8 comments:

Saba Akbar said...

बहुत ही खूबसूरती से गाया आपने..

इस गीत की ये लाइन "ठोकर जहाँ मैने खाई इन्होंने पुकारा मुझे
ये हमसफ़र हैं तो काफ़ी है इनका सहारा मुझे" मुझे बहुत प्यारी लगती है.

kshama said...

Behad achha laga is geet ko sunnaa!!
Mashallah! Kya aawaaz payee hai aapne!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आप की आवाज़ में जादू है .

सादर

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत अच्छा लगता है यह गीत।

Mukesh Kumar Sinha said...

pyara sa geet aur sangeet..:)

आशीष मिश्रा said...

बहोत ही अच्छा गाया है आपने

Sadhana Vaid said...

बहुत मधुर है आपकी आवाज़ ! अपना बहुत ही पसंदीदा गीत आपकी दिलकश आवाज़ में सुनना बहुत खुशी दे गया ! आपका आभार एवं धन्यवाद !

mark rai said...

गाना बस एक शौक है और साज़ के साथ आवाज़ मिलाने की ख्वाहिश को पूरा करने की राह में कुछ क़दम...........
बहुत ही खूबसूरती से गाया आपने......