Featured Post

खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Apr 7, 2010

४६-रुके रुके से कदम



फिल्म : मौसम
संगीत : मदन मोहन
गीत : गुलज़ार
मूल गायिका : लता
[Vocals-Alpana ]
रुके रुके से कदम रुक के बार बार चले (२)
क़रार लेके तेरे दर से बेक़रार चले
रुके रुके से कदम रुक के बार बार चले
रुके रुके से कदम

सुबह ना आयी कई बार नींद से जागे (२)
कि एक रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले (२)
रुके रुके से कदम

उठाये फिरते थे एहसान दिल का सीने पर (२)
ले तेरे कदमों पे ये कर्ज़ भी उतार चले (२)
क़रार लेके तेरे दर से बेक़रार चले
रुके रुके से कदम रुक के बार बार चले
रुके रुके से कदम

Cover version
Play/ डाउनलोड .[ Mp3]
Song suggested  by Mr.Prakash Govind