'वक़्तनेकियाक्याहसींसितम ,तुमरहेनतुमहमरहेनहम 'फिल्म कागज के फूल [१९५९]के लिए गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा और सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में गीता जी ने गाया था.इसे अदाकार वहीदा रहमान और गुरु दत्त पर फिल्माया गया था.
यह गीत किसी परिचय का मोहताज नहीं है.गीता दत्त जी के गाये इस गीत को कई गायकों ने अपनी आवाज़ में दोबारा गाया.मगर गीता जी का जादू फ़िर कभी दोहराया नहीं गया.वह आज तक मूल गीत में कायम है और अनछुआ है।
मैं इस गीत को कभी गाने की जुर्रत न करती क्योंकि मेरी नज़र में यह अतुलनीय है,अनमोल है लेकिन गायक हर्षण नाम्ब्यार जी के सुझाव पर एक कोशिश की है।
जो भी गीत हम यहाँ गा रहे हैं उनके ट्रेक बने बनाये होते हैं और गीत को निभा सकना भी सीमित हो जाता है।इसलिए इस कोशिश को उसी के मद्दे नज़र तोलियेगा. Click here to Play or download Mp3
'वक़्त ने किया क्या हसीं सितम'[कवर संस्करण ]
[स्वर-अल्पना ]
'नन्ही कली सोने चली,हवा धीरे आना '
फिल्म-सुजाता
मूल गायिका-गीता दत्त
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
संगीतकार-सचिन देव बर्मन
प्रस्तुत संस्करण के लिए ट्रेक मुज्जफर नकवी साहब ने की बोर्ड पर तैयार किया है.
गीत
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नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना
नींद भरे पंख लिए झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली
1-चांद किरन सी गुड़िया नाज़ों की है पली
आज अगर चांदनिया आना मेरी गली
गुन गुन गुन गीत कोई हौले हौले गाना
नींद भरे पंख लिए झूला झूला जाना
2-रेशम की डोर अगर पैरों को उलझाए
घुंघरू का दाना कोई शोर मचा जाए
रानी मेरे जागे तो फिर निंदिया तू बहलाना
नींद भरे पंख लिए झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना
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कभी न भूली जा सकने वाली लोरी..बहुत लोकप्रिय रही.आज बहुत से सुनने वाले शायद इस से अनभिग्य हों!कहते हैं कि इस गीत में लोरी के पूरे भाव लाने के लिए इस गाने की रेकॉर्डिंग रात को ही की गयी थी.जबकि रात को रेकॉर्डिंग करना उन दिनों सामान्य बात नहीं थी.गीत अभिनेत्री सुलोचना पर फिल्माया गया था.
Uma devi/Tun Tun[11 July 1923 – 24 November 2003] हिंदी फ़िल्मों की जानीमानी हास्य अभिनेत्री टुनटुन जिन्होंने फिल्म जगत में उमा देवी के नाम से एक गायिका के रूप में प्रवेश लिया था. जी हाँ इन्हीं टुनटुन का असली नाम उमा देवी खत्री था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एक दूरदराज़ गाँव में हुआ था और बचपन में ही अपने माता-पिता दोनों को खो चुकी थीं.रेडियो पर गाने सुन सुन कर उन्हें गायिका बनने की चाहत मुम्बई ले आई उस समय उनकी आयु मात्र १३ साल थी.इस कहानी को लगभग सभी जानते हैं. उनकी आवाज़ में एक कशिश थी बहुत मीठी आवाज़ की मल्लिका थीं वे. वह नौशाद साहब के लिए ही गाना चाहती थीं और उनकी यह तमन्ना १९४७ की फिल्म दर्द में पूरी हुई.यह उनका सब से अधिक लोकप्रिय गीत रहा.उनको इस क्षेत्र में वो मुकाम नहीं मिल सका जिसकी वे हक़दार थीं.उन्हीं के मुंह भोले भाई संगीतकार नौशाद साहब ने उन्हें फिल्मों में अभिनय की सलाह दी और उन्होंने बतौर हास्य अभिनेत्री फिल्म बाबुल में काम किया और उसके बाद हास्य अभिनेत्री के तौर पर सफलता के नए मुकाम हासिल किये. उमा देवी का नया नाम टुनटुन बेहद लोकप्रिय हुआ.उनके पति मोहन की मृत्यु १९९२ में हुई और २००३ में उनका निधन हुआ था.उनकी दो पुत्रियाँ और एक पुत्र है.वे अँधेरी ,मुम्बई में रहती थीं.
उनका जन्म दिवस ११जुलाईको था किसी कारण से उस दिवस को यह गीत नहीं लगा सकी इसलिए आज इस गीत को अपनी ओर से श्रद्धा सुमन के रूप में अर्पित करती हूँ. [गीत का कवर संस्करण -अल्पना ] Play OR Download mp3 Here
फ़िल्म - दर्द, मूल गायिका - उमादेवी (टुनटुन), संगीतकार - नौशाद, गीतकार - शकील बदायूँनी [इसे अभिनेत्री मुनव्वर सुलताना पर फिल्माया गया था ] अफ़साना लिख रही हूँ दिल-ए-बेक़रार का आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का अफ़साना लिख रही हूँ
जब तू नहीं तो कुछ भी नहीं है बहार में जी चाहता है मूँह भी न देखूँ बहार का आँखोँ में रन्ग भर के तेरे इंतज़ार का अफ़साना लिख रही हूँ
हासिल हैं यूँ तो मुझको ज़माने की दौलतें
लेकिन नसीब लाई हूँ इक सोग़वार का आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का अफ़साना लिख रही हूँ आजा कि अब तो आँख में आँसू भी आ गये
साग़र छलक उठा मेरे सब्र-ओ-क़रार का आँखोँ में रंग भर के तेरे इंतज़ार का अफ़साना लिख रही हूँ -------------