रहते थे कभी जिनके दिल में
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फिल्म-ममता
संगीत -रोशन
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
अभिनत्री -सुचित्रा सेन
रहते थे कभी जिनके दिल में
हम जान से भी प्यारों की तरह
बैठे हैं उन्ही के कूचे में
हम आज गुनहगारों की तरह
दावा था जिन्हें हमदर्दी का
खुद आके न पूछा हाल कभी
महफ़िल में बुलाया है हम पे
हँसने को सितमगारों की तरह
बरसों से सुलगते तन मन पर
अश्कों के तो छींटे दे ना सके
तपते हुए दिल के ज़ख्मों पर
बरसे भी तो अंगारों की तरह
सौ रुप धरे जीने के लिये
बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिये
ठोकर ना लगाना हम खुद हैं
गिरती हुई दीवारों की तरह
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यह ग़ज़ल जो मुझे बहुत पसंद है.
यह उन कुछ गीतों में से एक है जो मुझ से स्कूल के दिनों में मेरी सहेलियां अक्सर सुनती थीं.
..बिना संगीत ..सिर्फ स्वर...
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