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खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Nov 23, 2013

चाँद फिर निकला...



फिल्म- पेईंग गेस्ट
संगीत-सचिनदेव बर्मन
गीत-मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायिका -लता मंगेशकर
गीत के बोल-

चाँद  फिर निकला, मगर तुम न आये
जला फिर मेरा दिल, करुँ क्या मैं हाय
चांद फिर निकला ...

१-ये रात कहती है वो दिन गये तेरे
ये जानता है दिल के तुम नहीं मेरे
खड़ी मैं हूँ फिर भी निगाहें बिछाये
मैं क्या करूँ हाय के तुम याद आये
चाँद फिर निकला ...

२-सुलगते सीने से धुंआ सा उठता है
लो अब चले आओ के दम घुटता हैं
जला गये तन को बहारों के साये
मैं क्या करुँ हाय के तुम याद आये
चाँद फिर निकला ...
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कवर संस्करण -प्रस्तुति---अल्पना

Vocals-Alpana
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