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Sep 22, 2013

अगर हम कहें और ....[ग़ज़ल]

अगर हम कहें और ..
Lyrics-
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे
चलो  उनके चहरे से पर्दा हटा दें

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें

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सुदर्शन फ़ाकिर की लिखी ग़ज़ल का संगीत जगजीत सिंह जी ने ही दिया है.

मूल ग़ज़ल को  जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने गाया है.
यहाँ प्रस्तुत संस्करण में राजा पाहवा और अल्पना के स्वर हैं.
दो साल से अधूरी पड़ी हुई इस ग़ज़ल को अभी हाल ही में पूरा किया गया है.
राजा पाहवा का बहुत शुक्रिया जिन्होने अपनी गले की बीमारी  के बावजूद इसे पूरा किया है.

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