Aug 28, 2011

19-तदबीर से बिगड़ी हुई tadbeer se bigadi

Geeta Bali

फिल्म-बाजी-1951
संगीतकार- एस डी बर्मन
गीतकार -साहिर लुधियानवी
मूल गायिका -गीता दत्त
तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले

अपने पे भरोसा है तो ये दाँव लगा ले

1-डरता है ज़माने की निगाहों से भला क्यों

इन्साफ़ तेरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले

2-क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो

ख़ुद मिट के किसी और को मिटने से बचा ले

3-टूटे हुए पतवार हैं किश्ती के तो ग़म क्या

हारी हुई बाहों को ही पतवार बना ले

तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले

अपने पे भरोसा है तो ये दाँव लगा ले
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इस गीत को मेरे स्वर में सुनिए :-
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---------------video------- अगर प्लेयर काम नहीं कर रहा तो यहाँ पर भी सुन सकते हैं.

Aug 19, 2011

16-इतनी शक्ति हमें देना दाता[अंकुश] Itni shakti hamen dena

 This Song is my most downloaded cover song ] .

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This Song was suggested by Pandit D.K.Sharma'Vats'
Minus track and my vocals were mixed by Arvind Sharman in his mumbai recording studio.
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फ़िल्म : अंकुश
Original Singer: Pushpa Pagdhare, Sushma Sreshtha
Music Director: Kuldip Singh
Lyrics: Abhilash
-प्रस्तुत गीत में स्वर -अल्पना

इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न---


दूर अज्ञान के हों अँधेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचते रहें हम
जितनी भी दे भली ज़िन्दग़ी दे
बैर हो न, किसी का किसी से
भवना मन में बदले की हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न---

हम न सोचें हमें क्या मिला है
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाँटें सभी को
सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा का जल तू बहाकर
करदे पावन हरेक मनका कोना
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे
भूल कर भी कोई भूल हो न----



इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न---
Cover by -Alpana
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Aug 16, 2011

तुम मुझे भूल भी जाओ[duet]

तुम मुझे भूल भी जाओ
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तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको ,
मेरी बात और है मैंने तो मोहब्बत की है,

मेरे दिल की मेरे जज़बात की क़ीमत क्या है
उलझे-उलझे से ख़्यालात की क़ीमत क्या है
मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया
इन परेशान सवालात की क़ीमत क्या है
तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है

ज़िन्दगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है
ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में
इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको
मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है

तुमको दुनिया के ग़म-ओ-दर्द से फ़ुरसत ना सही
सबसे उलफ़त सही मुझसे ही मुहब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम है
तुम मेरे होके रहो ये मेरी क़िस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है

*यह गीत साहिर साहब का लिखा हुआ है और इसकी तर्ज़ सुधा मल्होत्रा जी ने बनायी थी.संगीत-एन.दत्ता का है.
शोभा खोटे और सुनील दत्त पर फिल्माया हुआ फिल्म दीदी[१९५९] से है.
मूल गायक मुकेश और सुधा मल्होत्रा हैं .
यहाँ प्रस्तुत गीत जो कि कवर संस्करण है ,श्री दिलीप कवठेकर जी और मेरा गाया हुआ है.
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