Jun 11, 2010

५३ -'मिलकर जुदा हुए तो '



शायर क़तील शिफाई की एक ग़ज़ल
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मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम

आंसू छलक छलक के सताएंगे रात भर
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम

जब दूरियों की आग दिलों को जलाएगी
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम

गर दे गया दगा़ हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम


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मूल ग़ज़ल 'Album A Milestone' से जगजीत और चित्रा जी की आवाज़ में है.

यहाँ प्रस्तुत कवर संस्करण गायक राजा पाहवा और अल्पना के स्वरों में है.


May 20, 2010

५२ -ये शाम की तन्हाईयाँ '


बेहद शालीन, खूबसूरत और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों में आस्था रखने वाली ,फिल्म मदर इंडिया में राधा की भूमिका करने वाली नर्गिस ,भारतीय नारी को एक नया और सशक्त रूप देने वाली हिन्दी सिनेमा की सर्वश्रष्ठ अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती हैं।
1 जून को जन्मी इस अभिनेत्री ने दो दशक के फिल्मी सफर में दर्जनों यादगार भूमिकाएँ कीं.

राजकपूर के साथ उनकी जोड़ी को आज भी याद किया जाता है.उन्होंने बहुत ही सफल फ़िल्में दीं .उन्हीं में से एक थी फिल्म--'आह' इस फिल्म का हर गीत आज भी दिल को छू जाता है.चाहे वह 'राजा की आएगी बारात' हो या 'आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा.'
इसी फिल्म से नर्गिस पर फिल्माया लता जी का गाया एक बेहतरीन दर्द भरा गीत है 'ये शाम की तन्हाईयाँ'
इसके गीतकार शैलेन्द्र और संगीतकार शंकर -जयकिशन हैं.


इसी गीत को मैंने यहाँ अपने स्वर में प्रस्तुत किया है.आशा है आप को पसंद आएगा.
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May 12, 2010

५१-अब के बरस भेज भैया को बाबुल



फिल्म-बंदिनी [१९६३]
गीतकार-शैलेन्द्र
संगीतकार-सचिन देव बर्मन
मूल गायिका -आशा भोंसले

अब के बरस भेज भैय्या को बाबुल, सावन में लीजो बुलाए रे
लौटेंगी जब मेरे बचपन की सखियाँ, देजो संदेशा भिजाए रे
अब के बरस भेज भैय्या को बाबुल ...

अम्बुवा तले फिर से झूले पड़ेंगे, रिमझिम पड़ेंगी फुहारें
लौटेंगी फिर तेरे आंगन में, बाबुल सावन की ठंडी बहारें
छलके नयन मोरा कसके रे जियरा, बचपन की जब याद आए रे
अब के बरस भेज भैय्या को बाबुल ...

बैरन जवानी ने छीने खिलौने, और मेरी गुड़िया चुराई
बाबुल थी मैं तेरे नाज़ों की पाली, फिर क्यों हुई मैं पराई
बीते रे जग कोई चिठिया पाती, कोई नैहर से आए रे
अब के बरस भेज भैय्या को बाबुल

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प्रस्तुत है इस गीत का कवर वर्शन -[ स्वर --अल्पना ]
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