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खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Feb 16, 2017

ये रात ये फ़िज़ायें - फिल्म -बटवारा [1961]

फिल्म -बटवारा [1961]
गीतकार -मजरूह सुल्तानपुरी
संगीतकार-एस. मदान
मूल गायक-मो रफ़ी और आशा भोसले
प्रस्तुत गीत में स्वर -Safeer Ahmad and Alpana Verma
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Ye Raat ye fizayen-Song-Lyrics
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ये रात ये फ़िज़ायें फिर आएँ या न आएँ
आओ शमा बुझा के हम आज दिल जलायें

१.ये नर्म सी ख़ामोशी ये रेशमी अँधेरा
कहता है ज़ुल्फ़ खोलो रुक जाएगा सवेरा
जुगनू से मिल के चमके तारे से झिलमिलायें ,
आओ शमा बुझा के हम आज दिल जलायें

२.भीगी हुई   हवा है अब रात ढल रही है
ऐसे में दो दिलों की  एक शमा जल रही है
ये प्यार का उजाला मिलके अमर बनाएँ
आओ शमा बुझा के हम आज दिल जलायें

ये रात ये फ़िज़ायें .....

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One of my favourite song.

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